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परमश्रद्धेय श्री भूल्लन त्यागी जी महाराज का जीवन चरित्र एवं कृतित्व

   संसार में मर्यादा एवं धर्म की रक्षा व दीक्षा के लिए मुनि व संत महापुरुष आविर्भूत हुआ करते हैं। ऐसे ही एक महान संत दिल्ली नजफगढ़ क्षेत्र के शिकारपुर गांव में श्री श्योराज त्यागी के आंगन में 10 मई 1964 को अवतरित हुए माता पिता ने प्यार से भूल्लन नाम रखा। जब आप डेढ़ महीने के थे तभी एक दवा के दुष्परिणाम स्वरूप आपकी आंखों की रोशनी चली गयी। आप बचपन से ही बड़े ईश्वर भक्त हैं। आप में सीखने की विलक्षण प्रतिभा हैं, सुनी हुई बात को आप बहुत जल्द आत्मसात कर लेते हैं।
    आप समाज में धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, कार्यक्रमों के द्वारा अपनी अमूल्य सेवा दे रहे हैं। भक्तगण, संत समाज, सब आपके संगीत को सुनकर ईश्वर प्रेम में भाव विभोर हो जाते हैं।आपने भीमेश्वरी संगीत विद्यालय के माध्यम से अनेक बालक, बालिकाओं को संगीत में प्रवीण ही नहीं किया बल्कि उनको जीवन यापन का एक साधन भी दे दिया। आप देश के कोने-कोने में अपने कार्यक्रमों के द्वारा समाज का सुधार तो कर ही रहे हैं अपना संदेश भी जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। आपका जीवन, आपका कृतित्व समाज को यह नयी दिशा दे रहा है और दिखता रहेगा।
1-  जन्म एवं लालन पालन

   अवतारी पुरषों के जन्म एवं लालन-पालन बहुत ही कौतूहल पूर्ण होते हैं जैसे प्रभू श्री राम का जन्म अवध में हुआ, माता पिता के साथ समस्त भक्त समाज ने उनकी बाल लीलाओं का आनन्द लिया। भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का आनन्द ब्रज के गोप, गोपी, नन्द यशोदा एवं भक्तगणों ने लिया।
    अन्य संतो का जन्म एवं बाल लीला बड़ी कौतूहल पूर्ण रही ऐसे ही हमारे पूज्य गरुदेव का जन्म पिता श्री श्योराज त्यागी एवं माता श्री प्रेम देवी के आंगन में हुआ इनकी बाल लीलाओं का आनन्द माता पिता के साथ समस्त ग्राम वासियों एवं बाल सखाओं ने लिया।
आपका लालन पालन आपके पैतृक गांव शिकारपुर में हुआ जो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 40 किमी पश्चिम दक्षिण में है।
    आप स्कूल शिक्षा हेतु नहीं गये, आपकी शिक्षा दीक्षा घर पर रहकर हुई आप अनेक शास्त्रों के ज्ञाता हैं। परिवार में भाईयों में आप सबसे जयेष्ठ हैं आप से छोटे दूसरे नम्बर के भाई श्री सुरेन्द्र त्यागी (दिल्ली पुलिस) में कार्यरत हैं तीसरे नम्बर के श्री राजबीर त्यागी, चौथे नम्बर के श्री रमेश त्यागी एवं पांचवे नं. के भाई नरेश त्यागी है।
    चारों छोटे भाई आपसे बहुत प्रेम करते हैं आदर सम्मान देते हैं आपकी चारों बहन क्रमश: श्रीमति कमलेश त्यागी, श्रीमति सुन्दरत्यागी, श्रीमति राजबाला त्यागी, श्रीमति सन्तोष त्यागी आपको बहुत स्नेह करती है। आपभी सभी भाई बहनों को पिता का प्यार देते हैं।
    आपके गुरुजी श्रीश्री 108 स्वामी कृष्णानंद सरस्वती हैं उन्हीं से आपने मंत्र दीक्षा प्राप्त की जिसके परिणाम स्वरूप आपको अध्यात्मिक मार्ग में एक सुन्दर मार्ग दर्शक मिले क्यों शास्त्र वचन है- गुरु बिन ज्ञान नहीं, आप गुरु के द्वारा बताये मार्ग पर बड़ी लगन से चल रहे हैं।
    आपने संगीत की शिक्षा अपने गांव के समीप वाले गांव झटीकरा के श्री मलखान त्यागी जी से ली उसके बाद दो वर्ष गन्धर्व संगीत विद्यालय आईटीओ दिल्ली सें संगीत सीख। आठ वर्ष तक श्री ध्रुवनाथ द्विवेदी जी नजफगढ़ (दिल्ली) से संगीत सीखा और प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से संगीत प्रभाकर की डिग्री प्राप्त की। सन् 1980 के दशक में जब आपकी आयु लगभग 16 वर्ष की थी तब से ही आप आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर अपने कार्यक्रम दे रहे हैं।
2- आदि शक्ति के उपासक

   आप मां जगदम्बा भवानी के परम उपासक है मां सरस्वती के सच्चे भक्त हैं। मां भगवती की आप पर अपार कृपा है।
3- तीर्थ निष्ठा

   सतगुरु श्री भूल्लन त्यागी जी की तीर्थ निष्ठा अनुकरणीय है। आप प्रतिवर्ष अपनी भक्त मण्डली के साथ बिना किसी भय के निकल पड़ते हैं। तीर्थवास आपको बहुत प्रिय है। वहां पर आप सन्तों के संग सत्संग एवं भजन कीर्तन करते हैं और भक्तों को आनंद एवं सुख देते है। मार्ग में सभी विघ्न बाधाओं को स्वयं सहकर भक्तों को सुख पहुंचाते हैं।

4- सनातन धर्म के सजग प्रहरी

   सनातन धर्म के पांच मूल तत्व हैं:- गौ, गुरु, गंगा, गीता, गायत्री इन पांचों आकारों में जहाँ निष्ठा है वहीं सनातन धर्म अवस्थित है। गुरु में अनन्य भक्ति गुरु, निष्ठा, गऊ में पूज्य भाव गौ निष्ठा गंगा में पूज्य भाव गंगा निष्ठा, गीता में अनन्य भक्ति गीता निष्ठा, गायत्री में पूर्ण निष्ठा गायत्री निष्ठा है।
    सनातन धर्म की यह घोषणा है- निष्ठा ही मानव कल्याण की भगवत प्राप्ति का एक मात्र साधन हे अत: साधन साध्य से प्रथम है अत: निष्ठा का दर्जा भगवान से भी ऊपर है। इन निष्ठाओं को धारण करने वाला ही सच्चा सनातन अवलम्बी महापुरुष है। ऐसे ही निष्ठावान परम संत श्री भूल्ल्न त्यागी जी महाराज हैं जो इन पांचों तत्वों को धारण करके सनातन धर्म की सेवा कर रहे हैं।
5- नारी के प्रति सम्मान

   नारी उत्थान के प्रति आप कर्मठ एवं जागरूक हैं। आप नारी को भोग की नहीं अपितु उपासना की मूर्ति मानते हैं। आपने सम्पूर्ण नारी जाति को माता के रूप में देखा है। आप बाल ब्रह्मचारी रहकर निवृत्ति मार्ग के उपासक हैं। आपने हमेशा मातृ शक्ति का हित सोचा है और उन्हें जागृति दिलाते हुए यह कहते रहते हैं कि आप भक्ति स्वरूपा हो, उठो जागो पहचानों अपनी शक्ति को तुम दुर्गा हो, काली हो तुम्हारे में बड़ी ऊर्जा एवं शक्ति है। तुम गार्गी, मीरा,रानी लक्ष्मीबाई, सावित्री बनकर देश और समाज का गौरव बढ़ा सकती हो। समाज में आज कितनी बहनें आपकी प्रेरणा से समाज सेवा का आदर्श प्रस्तुत कर रही हैं। आप सभी प्राणियों के प्रति समभाव रखते हैं। किसी के प्रति पराये पन का भाव आप में छू तक नहीं गया है। ‘‘सिया राम मय सग जग जानी’’ का भाव आपके जीवन में पूर्ण रूप से भरा हुआ है।
6- निष्काम कर्म योग

   गृहस्थ होकर भी आप बहुत बड़े सन्यासी और सन्यासी होकर भी आप एक बड़े गृहस्थ हैं। आप घर परिवार में रहते हुए घर की परिवार की मोह ममता छोड़कर सदा निष्काम कर्म से धर्म के प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। आप अपने संगीत विद्यालय के सभी बालक-बालिकाओं को अपना परिवार मानते हैं।
    आप अपने शिष्यों को माता-पिता दोनों का प्रेम देते हैं। आपका वात्सल्य भाव देखते ही बनता है। अतिथि सम्मान करना कोई आपसे सीखे, एक गृहस्थ सन्यासी एवं एक सन्यासी सच्चा-सच्चा गृहस्थ नहीं हो सकता लेकिन आप दोनों आश्रमों के क्रियाकलापों को पूर्ण रूप से निर्वाहन कर रहे है।
    सबके शुभ चिंतक- आप सन्त, महापुरुषों, विद्वानों, ब्राह्मणों एवं शिक्षकों का बड़ा आदर सम्मान करते हैं। बशर्ते कि वे सब अपने-अपने कार्य में  लग्नपूर्वक संलग्न हो, चालाकी भरी, हृदयहीन, महत्वहीन बात पर आपको रोष आ जाता है। यह कोई दुष्ट प्रवृति नहीं बल्कि दुष्ट प्रवति को रोकने के लिए है यदि समाज के जिम्मेदार व्यक्ति के क्रियाकलापों पर महापुरुष ध्यान नहीं देंगे तो समाज में व्याभिचार, अत्याचार फैल जायेगा और समाज पतन की ओर अग्रसर हो जाएगा। अनुशासन बढ़ जायेगा वास्तव में सदगुरु श्री भूल्लन त्यागी जी सबके शुभ चिंतक है। सच्चे ब्राह्मण, सन्त, विद्वान, शिक्षक, वर्ग के लिए आपका तन मन धन सब न्यौछावर है। आप विश्व कल्याण की भावना से ही समाज का कल्याण कर रहे हैं। सर्वगुण सम्पन्न तो कोई नहीं होता फिर भी उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं होती। आप सच्चे धर्म प्रचारक एवं समाज सुधारक है।
7- देशप्रेम

   आप अपने कार्यक्रमों का शुभारंभ जब देशभक्ति गीत प्रस्तुत करके करते है तो खुद ब खुद यह दर्शाता है कि देश प्रेम आपमें कितना कूट-कूट के भरा हुआ है। देश पर अपना सर्वस्व भाव राष्ट्र हमारी माता है। देश और स्वधर्म को आप आगे उठाकर सारे कार्य व्यवहार करते हैं।
8- ईश्वर प्रेम

   भगवान श्री परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण पर विशेष श्रद्धा रखते हैं। आपके द्वारा रचित रचनायें भारतवर्ष के साथ-साथ विदेशों में भी भजन गायक बड़ी श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करते हैं।
9- साहित्य प्रेम

   भारतीय साहित्य के प्रति आपका लगाव प्रशंसनीय है। आपने अनेक ग्रंथों का श्रवण किया है। आपने श्री परशुराम गाथा के रूप में एक वृहद ग्रन्थ की रचना की है। अनेक भक्ति रचनाएं भी आपने लिखी है। अपनी रचनाओं को स्वयं गाकर सीडी एवं वीसीडी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। आपका जीवन, आपका कर्मयोग, आपकी ईश्वर निष्ठा सब अनुकरणीय, प्रशंसनीय वंदनीय है।
(शिष्यगण)